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ऑस्ट्रेलिया दौरे से पहले पीएम मोदी को ऑनलाइन जान से मारने की धमकी, AFP ने संदिग्ध की पहचान कर जारी की चेतावनी

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नई दिल्ली/मेलबर्न। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ऑस्ट्रेलिया दौरे से पहले उन्हें सोशल मीडिया पर जान से मारने की धमकी मिलने का मामला सामने आया है। इस घटना के बाद ऑस्ट्रेलियन फेडरल पुलिस (AFP) ने तत्काल जांच शुरू की और धमकी देने वाले व्यक्ति की पहचान कर उसे औपचारिक चेतावनी (Formal Warning) जारी की है। अधिकारियों के अनुसार फिलहाल प्रधानमंत्री मोदी या आम जनता के लिए किसी भी प्रकार का तत्काल सुरक्षा खतरा नहीं है।

फेसबुक पोस्ट पर की गई थी धमकी

जानकारी के अनुसार, मेलबर्न में आयोजित होने वाले ‘Melbourne Meets Modi’ कार्यक्रम से संबंधित एक फेसबुक पोस्ट के कमेंट सेक्शन में प्रधानमंत्री मोदी को निशाना बनाते हुए आपत्तिजनक और धमकी भरी टिप्पणी की गई थी। मामला सामने आते ही आयोजकों ने इसकी सूचना ऑस्ट्रेलियन फेडरल पुलिस को दी, जिसके बाद एजेंसी ने तुरंत जांच शुरू कर दी।

जांच में संदिग्ध की हुई पहचान

AFP ने तकनीकी जांच के माध्यम से ऑनलाइन पोस्ट के स्रोत का पता लगाया और संबंधित युवा व्यक्ति से पूछताछ की। जांच के बाद उसे औपचारिक चेतावनी जारी की गई। पुलिस का कहना है कि मामले का विस्तृत आकलन किया गया है और वर्तमान में किसी बड़े सुरक्षा खतरे के संकेत नहीं मिले हैं। हालांकि, ऐसे मामलों को गंभीरता से लेते हुए आगे भी निगरानी जारी रहेगी।

पीएम मोदी के दौरे की सुरक्षा और कड़ी

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जल्द ही ऑस्ट्रेलिया के आधिकारिक दौरे पर पहुंचेंगे, जहां उनकी ऑस्ट्रेलियाई प्रधानमंत्री के साथ द्विपक्षीय वार्ता के अलावा भारतीय समुदाय के एक बड़े कार्यक्रम में शामिल होने की भी योजना है। इस हाई-प्रोफाइल दौरे को देखते हुए पहले से ही कड़े सुरक्षा इंतजाम किए गए थे। ऑनलाइन धमकी मिलने के बाद सुरक्षा व्यवस्था की दोबारा समीक्षा की गई है और निगरानी को और मजबूत किया गया है।

भारत-ऑस्ट्रेलिया संबंधों पर रहेगा फोकस

प्रधानमंत्री मोदी के इस दौरे के दौरान दोनों देशों के बीच व्यापार, रक्षा सहयोग, स्वच्छ ऊर्जा, महत्वपूर्ण खनिज, इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में साझेदारी और नई तकनीकों समेत कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा होने की संभावना है। अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि सुरक्षा अलर्ट के बावजूद प्रधानमंत्री के कार्यक्रम में किसी बदलाव की घोषणा नहीं की गई है।

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ऑस्ट्रेलियाई सुरक्षा एजेंसियों का कहना है कि किसी भी विदेशी राष्ट्राध्यक्ष को दी जाने वाली धमकियों को अत्यंत गंभीरता से लिया जाता है। इसी कारण इस मामले में त्वरित कार्रवाई करते हुए संदिग्ध की पहचान की गई और आवश्यक कानूनी प्रक्रिया अपनाई गई। सुरक्षा एजेंसियां प्रधानमंत्री मोदी के दौरे के दौरान लगातार स्थिति पर नजर बनाए रखेंगी।

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Ram Mandir Trust Meeting: चंपत राय का इस्तीफा मंजूर, बजरंग बागड़ा बने श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के नए महासचिव

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अयोध्या। श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट की सोमवार को अयोध्या में हुई महत्वपूर्ण बैठक में बड़ा प्रशासनिक बदलाव देखने को मिला। ट्रस्ट के लंबे समय से महासचिव रहे चंपत राय का इस्तीफा आधिकारिक रूप से स्वीकार कर लिया गया। उनकी जगह विश्व हिंदू परिषद (VHP) से जुड़े वरिष्ठ पदाधिकारी बजरंग बागड़ा को ट्रस्ट का नया महासचिव नियुक्त किया गया है। यह फैसला ऐसे समय में आया है, जब राम मंदिर में श्रद्धालुओं द्वारा चढ़ाए गए दान (चढ़ावा) में कथित चोरी और अनियमितताओं को लेकर विवाद बना हुआ है।

ट्रस्ट की इस बैठक में मंदिर प्रशासन, सुरक्षा व्यवस्था, वित्तीय पारदर्शिता और श्रद्धालुओं को बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराने सहित कई महत्वपूर्ण विषयों पर विस्तार से चर्चा की गई। ट्रस्ट ने स्पष्ट किया कि राम मंदिर की व्यवस्था को और अधिक पारदर्शी, आधुनिक और जवाबदेह बनाने के लिए लगातार सुधार किए जाएंगे।

चंपत राय का इस्तीफा क्यों बना चर्चा का विषय?

चंपत राय राम मंदिर आंदोलन के प्रमुख चेहरों में रहे हैं और श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के गठन के बाद से महासचिव की जिम्मेदारी संभाल रहे थे। उनके कार्यकाल में राम मंदिर निर्माण का अधिकांश कार्य पूरा हुआ और जनवरी 2024 में भगवान श्रीरामलला की प्राण प्रतिष्ठा जैसे ऐतिहासिक आयोजन का सफल संचालन भी हुआ।

हालांकि, हाल के दिनों में राम मंदिर में चढ़ावे की कथित चोरी और वित्तीय अनियमितताओं के आरोपों के बाद ट्रस्ट पर सवाल उठने लगे थे। इसी बीच ट्रस्ट की बैठक में उनका इस्तीफा स्वीकार किया गया। हालांकि ट्रस्ट की ओर से यह स्पष्ट किया गया है कि यह नियमित प्रशासनिक प्रक्रिया का हिस्सा है और इसे जांच से जोड़कर नहीं देखा जाना चाहिए।

बजरंग बागड़ा को मिली नई जिम्मेदारी

ट्रस्ट ने सर्वसम्मति से बजरंग बागड़ा को नया महासचिव नियुक्त किया। बजरंग बागड़ा लंबे समय से विश्व हिंदू परिषद और राम मंदिर आंदोलन से जुड़े रहे हैं। संगठनात्मक अनुभव, प्रशासनिक क्षमता और धार्मिक गतिविधियों में सक्रिय भूमिका को देखते हुए उन्हें यह महत्वपूर्ण जिम्मेदारी सौंपी गई है।

ट्रस्ट को उम्मीद है कि उनके नेतृत्व में मंदिर प्रशासन और अधिक व्यवस्थित होगा तथा श्रद्धालुओं के लिए आधुनिक सुविधाओं का विस्तार किया जाएगा।

चढ़ावा चोरी विवाद पर क्या हुई चर्चा?

बैठक में हाल ही में सामने आए राम मंदिर चढ़ावा चोरी विवाद पर भी विस्तार से चर्चा की गई। ट्रस्ट के सदस्यों ने कहा कि श्रद्धालुओं की आस्था सर्वोपरि है और दान राशि के प्रबंधन में किसी भी प्रकार की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।

सूत्रों के अनुसार, जांच एजेंसियां पूरे मामले की जांच कर रही हैं। ट्रस्ट ने कहा कि यदि किसी स्तर पर अनियमितता सामने आती है तो दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। साथ ही दान संग्रह और उसकी निगरानी के लिए तकनीकी व्यवस्थाओं को और मजबूत करने पर भी विचार किया गया।

मंदिर प्रशासन को और पारदर्शी बनाने पर जोर

बैठक के दौरान ट्रस्ट ने कई महत्वपूर्ण सुधारों पर सहमति जताई। इनमें शामिल हैं—

  • दान संग्रह व्यवस्था को पूरी तरह डिजिटल और पारदर्शी बनाना।
  • सीसीटीवी निगरानी और सुरक्षा व्यवस्था को और मजबूत करना।
  • श्रद्धालुओं की सुविधाओं का विस्तार।
  • मंदिर परिसर के संचालन में आधुनिक तकनीक का उपयोग।
  • वित्तीय ऑडिट और रिकॉर्ड प्रणाली को और अधिक प्रभावी बनाना।

ट्रस्ट का कहना है कि इन सुधारों का उद्देश्य केवल मंदिर प्रशासन को मजबूत बनाना नहीं, बल्कि करोड़ों श्रद्धालुओं के विश्वास को और अधिक मजबूत करना भी है।

राम मंदिर आंदोलन में चंपत राय की भूमिका

चंपत राय का नाम राम मंदिर आंदोलन के प्रमुख रणनीतिकारों में लिया जाता है। उन्होंने वर्षों तक विश्व हिंदू परिषद के माध्यम से मंदिर आंदोलन को आगे बढ़ाया। ट्रस्ट के महासचिव के रूप में उन्होंने मंदिर निर्माण, दान प्रबंधन, निर्माण एजेंसियों के समन्वय और प्रशासनिक व्यवस्थाओं में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

इसी कारण उनका इस्तीफा स्वीकार किए जाने की खबर राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा का विषय बनी हुई है।

आगे क्या?

ट्रस्ट की ओर से संकेत दिए गए हैं कि आने वाले समय में मंदिर प्रशासन में और भी कई सुधारात्मक कदम उठाए जाएंगे। श्रद्धालुओं की सुरक्षा, दान व्यवस्था की पारदर्शिता और मंदिर प्रबंधन की दक्षता को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जाएगी।

बजरंग बागड़ा के महासचिव बनने के बाद अब सभी की नजर इस बात पर रहेगी कि वे मंदिर प्रशासन को किस दिशा में आगे बढ़ाते हैं और चढ़ावा विवाद से जुड़े मामलों में ट्रस्ट किस प्रकार की कार्रवाई करता है।

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Uttar Pradesh

काशी में PM मोदी ने जाना उज्जैन की ‘वैदिक घड़ी’ का रहस्य, आखिर क्या है विक्रमादित्य वैदिक क्लॉक की खासियत?

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वाराणसी स्थित में आयोजित एक विशेष कार्यक्रम के दौरान प्रधानमंत्री Narendra Modi ने उज्जैन की प्रसिद्ध ‘विक्रमादित्य वैदिक घड़ी’ के बारे में विस्तार से जानकारी ली। इस अनोखी घड़ी ने एक बार फिर देशभर का ध्यान अपनी ओर खींच लिया है, क्योंकि यह केवल समय बताने वाली साधारण घड़ी नहीं बल्कि भारतीय वैदिक गणना, खगोल विज्ञान और सनातन परंपरा का अद्भुत संगम मानी जाती है।

क्या है विक्रमादित्य वैदिक घड़ी?

दुनिया की पहली ऐसी डिजिटल वैदिक घड़ी मानी जाती है जो भारतीय कालगणना के आधार पर समय दर्शाती है। इसे मध्य प्रदेश के उज्जैन शहर में स्थापित किया गया है, जिसे प्राचीन काल से ज्योतिष और खगोल विज्ञान का प्रमुख केंद्र माना जाता रहा है।

यह घड़ी केवल घंटे और मिनट ही नहीं बताती, बल्कि भारतीय पंचांग के कई महत्वपूर्ण तत्व भी दर्शाती है, जैसे:

  • • तिथि
  • • वार
  • • नक्षत्र
  • • योग
  • • करण
  • • शुभ मुहूर्त
  • • सूर्योदय और सूर्यास्त का समय
  • • ग्रहों की स्थिति
  • • विक्रम संवत की जानकारी

क्यों खास मानी जाती है यह घड़ी?

सामान्य घड़ियां ग्रेगोरियन कैलेंडर और आधुनिक समय प्रणाली पर आधारित होती हैं, जबकि विक्रमादित्य वैदिक घड़ी भारतीय वैदिक पद्धति और प्राचीन खगोलीय गणनाओं के आधार पर काम करती है। यही वजह है कि इसे भारतीय संस्कृति और विज्ञान का आधुनिक रूप कहा जा रहा है।

विशेषज्ञों के अनुसार यह घड़ी उज्जैन की उस ऐतिहासिक पहचान को भी मजबूत करती है, जहां से प्राचीन समय में कालगणना और ज्योतिषीय अध्ययन किया जाता था। माना जाता है कि प्राचीन भारत में उज्जैन को समय निर्धारण का प्रमुख केंद्र माना जाता था।

PM मोदी ने क्यों दिखाई दिलचस्पी?

काशी विश्वनाथ मंदिर में आयोजित कार्यक्रम के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस वैदिक घड़ी की कार्यप्रणाली और वैज्ञानिक आधार को लेकर जानकारी ली। सूत्रों के अनुसार उन्होंने भारतीय परंपरा और आधुनिक तकनीक के इस मेल को देश की सांस्कृतिक विरासत के लिए महत्वपूर्ण बताया।

प्रधानमंत्री पहले भी भारतीय ज्ञान परंपरा, खगोल विज्ञान और सनातन संस्कृति से जुड़े विषयों में रुचि दिखाते रहे हैं। ऐसे में विक्रमादित्य वैदिक घड़ी को लेकर उनकी जिज्ञासा को काफी अहम माना जा रहा है।

उज्जैन का ऐतिहासिक महत्व भी जुड़ा

को प्राचीन काल से ‘काल की नगरी’ कहा जाता है। यहां स्थित महाकालेश्वर मंदिर, ज्योतिषीय गणनाएं और विक्रम संवत का इतिहास उज्जैन को विशेष पहचान देते हैं। यही कारण है कि वैदिक घड़ी की स्थापना के लिए उज्जैन को चुना गया।

इस परियोजना को भारतीय संस्कृति, विज्ञान और तकनीक के संगम के रूप में देखा जा रहा है। देश-विदेश से आने वाले पर्यटक भी इस वैदिक घड़ी को देखने पहुंच रहे हैं।

भारतीय संस्कृति और विज्ञान का अनोखा मेल

विशेषज्ञों का मानना है कि विक्रमादित्य वैदिक घड़ी केवल धार्मिक या सांस्कृतिक प्रतीक नहीं, बल्कि भारतीय वैज्ञानिक परंपरा की आधुनिक प्रस्तुति भी है। यह नई पीढ़ी को भारतीय कालगणना और वैदिक ज्ञान से जोड़ने का प्रयास माना जा रहा है।

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पश्चिम बंगाल में सत्ता परिवर्तन के संकेत? एग्जिट पोल में BJP को बढ़त, TMC की बढ़ी चिंता

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Bengal Exit Poll 2026: बंगाल में पहली बार खिल सकता है कमल, TMC की बढ़ी टेंशन
पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 का मतदान समाप्त होते ही सामने आए एग्जिट पोल्स ने राज्य की राजनीति में बड़ा भूचाल ला दिया है। अधिकांश सर्वे एजेंसियों ने भारतीय जनता पार्टी को बढ़त देते हुए पहली बार बंगाल में कमल खिलने की संभावना जताई है। वहीं मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की तृणमूल कांग्रेस (TMC) के लिए यह चुनाव अब तक का सबसे कठिन मुकाबला माना जा रहा है।

294 सीटों वाली पश्चिम बंगाल विधानसभा में सरकार बनाने के लिए 148 सीटों की जरूरत होती है। कई एग्जिट पोल्स में BJP इस आंकड़े को पार करती नजर आ रही है, जबकि TMC को सत्ता से बाहर होने का अनुमान लगाया गया है। हालांकि कुछ सर्वे अब भी ममता बनर्जी की वापसी की संभावना जता रहे हैं, जिससे मुकाबला बेहद दिलचस्प हो गया है।

P-MARQ एग्जिट पोल में BJP को स्पष्ट बहुमत

P-MARQ के एग्जिट पोल ने बंगाल में BJP को बड़ी बढ़त दी है। सर्वे के मुताबिक:

  • BJP : 150-175 सीटें
  • TMC : 118-138 सीटें
  • कांग्रेस : 2-6 सीटें
  • अन्य : सीमित बढ़त

यह अनुमान सही साबित होता है तो बंगाल में पहली बार BJP अपने दम पर सरकार बना सकती है।

Matrize सर्वे में भी BJP सबसे आगे

Matrize के एग्जिट पोल ने भी BJP को बढ़त दिखाई है। आंकड़ों के अनुसार:

  • BJP : 146-161 सीटें
  • TMC : 125-140 सीटें
  • अन्य : 6-10 सीटें

सर्वे में माना गया है कि दक्षिण बंगाल और शहरी इलाकों में BJP को बड़ा फायदा मिल सकता है।

Chanakya और Poll Diary ने भी BJP को बढ़त दी

अन्य एजेंसियों के सर्वे भी लगभग इसी तस्वीर की ओर इशारा कर रहे हैं।

Chanakya Strategies

  • BJP : 150-160 सीटें
  • TMC : 130-140 सीटें

Poll Diary

  • BJP : 142-171 सीटें
  • TMC : 99-127 सीटें

इन सर्वे के अनुसार राज्य में एंटी-इनकंबेंसी और भ्रष्टाचार के मुद्दों का असर देखने को मिला है।

Peoples Pulse ने दिखाई अलग तस्वीर

जहां ज्यादातर एजेंसियां BJP को आगे बता रही हैं, वहीं Peoples Pulse का एग्जिट पोल पूरी तरह अलग तस्वीर पेश कर रहा है।

  • TMC : 177-187 सीटें
  • BJP : 95-110 सीटें

इस सर्वे में दावा किया गया है कि ममता बनर्जी की ग्रामीण पकड़ और महिला वोट बैंक अब भी मजबूत बना हुआ है।

क्यों अहम माना जा रहा है यह चुनाव?

साल 2011 में ममता बनर्जी ने 34 साल पुरानी वाम मोर्चा सरकार को सत्ता से हटाकर इतिहास रचा था। इसके बाद 2016 और 2021 में भी TMC ने शानदार जीत दर्ज की। लेकिन 2026 का चुनाव कई मायनों में अलग माना जा रहा है।

इस बार भाजपा ने चुनाव प्रचार में भ्रष्टाचार, शिक्षक भर्ती घोटाला, महिला सुरक्षा, घुसपैठ, बेरोजगारी और कानून व्यवस्था जैसे मुद्दों को जोर-शोर से उठाया। वहीं TMC ने लक्ष्मी भंडार जैसी योजनाओं, ग्रामीण नेटवर्क और महिला वोट बैंक के भरोसे चुनाव मैदान में उतरकर मुकाबले को रोचक बनाए रखा।

कांग्रेस और लेफ्ट लगभग मुकाबले से बाहर

ज्यादातर एग्जिट पोल्स में कांग्रेस और वाम दलों की स्थिति बेहद कमजोर दिखाई गई है। कई सर्वे में दोनों दलों का खाता खुलना भी मुश्किल बताया गया है। इससे साफ संकेत मिल रहे हैं कि बंगाल की राजनीति अब पूरी तरह BJP बनाम TMC की सीधी लड़ाई बन चुकी है।

क्या एग्जिट पोल फिर होंगे गलत?

पश्चिम बंगाल का चुनाव हमेशा से एग्जिट पोल्स के लिए चुनौतीपूर्ण रहा है। पिछले कई चुनावों में एग्जिट पोल्स और वास्तविक नतीजों में बड़ा अंतर देखने को मिला था। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि बंगाल का सामाजिक और क्षेत्रीय समीकरण अक्सर आखिरी समय में तस्वीर बदल देता है।

अब 4 मई पर टिकी पूरे देश की नजर

एग्जिट पोल्स ने भले ही राजनीतिक माहौल गर्म कर दिया हो, लेकिन असली फैसला 4 मई को मतगणना के बाद ही सामने आएगा। अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या बंगाल में पहली बार BJP सरकार बनाएगी या ममता बनर्जी लगातार चौथी बार सत्ता बचाने में सफल होंगी।

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