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Uttar Pradesh

काशी में PM मोदी ने जाना उज्जैन की ‘वैदिक घड़ी’ का रहस्य, आखिर क्या है विक्रमादित्य वैदिक क्लॉक की खासियत?

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वाराणसी स्थित में आयोजित एक विशेष कार्यक्रम के दौरान प्रधानमंत्री Narendra Modi ने उज्जैन की प्रसिद्ध ‘विक्रमादित्य वैदिक घड़ी’ के बारे में विस्तार से जानकारी ली। इस अनोखी घड़ी ने एक बार फिर देशभर का ध्यान अपनी ओर खींच लिया है, क्योंकि यह केवल समय बताने वाली साधारण घड़ी नहीं बल्कि भारतीय वैदिक गणना, खगोल विज्ञान और सनातन परंपरा का अद्भुत संगम मानी जाती है।

क्या है विक्रमादित्य वैदिक घड़ी?

दुनिया की पहली ऐसी डिजिटल वैदिक घड़ी मानी जाती है जो भारतीय कालगणना के आधार पर समय दर्शाती है। इसे मध्य प्रदेश के उज्जैन शहर में स्थापित किया गया है, जिसे प्राचीन काल से ज्योतिष और खगोल विज्ञान का प्रमुख केंद्र माना जाता रहा है।

यह घड़ी केवल घंटे और मिनट ही नहीं बताती, बल्कि भारतीय पंचांग के कई महत्वपूर्ण तत्व भी दर्शाती है, जैसे:

  • • तिथि
  • • वार
  • • नक्षत्र
  • • योग
  • • करण
  • • शुभ मुहूर्त
  • • सूर्योदय और सूर्यास्त का समय
  • • ग्रहों की स्थिति
  • • विक्रम संवत की जानकारी

क्यों खास मानी जाती है यह घड़ी?

सामान्य घड़ियां ग्रेगोरियन कैलेंडर और आधुनिक समय प्रणाली पर आधारित होती हैं, जबकि विक्रमादित्य वैदिक घड़ी भारतीय वैदिक पद्धति और प्राचीन खगोलीय गणनाओं के आधार पर काम करती है। यही वजह है कि इसे भारतीय संस्कृति और विज्ञान का आधुनिक रूप कहा जा रहा है।

विशेषज्ञों के अनुसार यह घड़ी उज्जैन की उस ऐतिहासिक पहचान को भी मजबूत करती है, जहां से प्राचीन समय में कालगणना और ज्योतिषीय अध्ययन किया जाता था। माना जाता है कि प्राचीन भारत में उज्जैन को समय निर्धारण का प्रमुख केंद्र माना जाता था।

PM मोदी ने क्यों दिखाई दिलचस्पी?

काशी विश्वनाथ मंदिर में आयोजित कार्यक्रम के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस वैदिक घड़ी की कार्यप्रणाली और वैज्ञानिक आधार को लेकर जानकारी ली। सूत्रों के अनुसार उन्होंने भारतीय परंपरा और आधुनिक तकनीक के इस मेल को देश की सांस्कृतिक विरासत के लिए महत्वपूर्ण बताया।

प्रधानमंत्री पहले भी भारतीय ज्ञान परंपरा, खगोल विज्ञान और सनातन संस्कृति से जुड़े विषयों में रुचि दिखाते रहे हैं। ऐसे में विक्रमादित्य वैदिक घड़ी को लेकर उनकी जिज्ञासा को काफी अहम माना जा रहा है।

उज्जैन का ऐतिहासिक महत्व भी जुड़ा

को प्राचीन काल से ‘काल की नगरी’ कहा जाता है। यहां स्थित महाकालेश्वर मंदिर, ज्योतिषीय गणनाएं और विक्रम संवत का इतिहास उज्जैन को विशेष पहचान देते हैं। यही कारण है कि वैदिक घड़ी की स्थापना के लिए उज्जैन को चुना गया।

इस परियोजना को भारतीय संस्कृति, विज्ञान और तकनीक के संगम के रूप में देखा जा रहा है। देश-विदेश से आने वाले पर्यटक भी इस वैदिक घड़ी को देखने पहुंच रहे हैं।

भारतीय संस्कृति और विज्ञान का अनोखा मेल

विशेषज्ञों का मानना है कि विक्रमादित्य वैदिक घड़ी केवल धार्मिक या सांस्कृतिक प्रतीक नहीं, बल्कि भारतीय वैज्ञानिक परंपरा की आधुनिक प्रस्तुति भी है। यह नई पीढ़ी को भारतीय कालगणना और वैदिक ज्ञान से जोड़ने का प्रयास माना जा रहा है।

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गाजीपुर घटना के बाद सपा का बड़ा कदम: अखिलेश यादव का दौरा टला, पीड़ित परिवार को आर्थिक सहायता

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उत्तर प्रदेश के गाजीपुर जिले में हाल ही में हुई घटना के बाद राजनीतिक गतिविधियां तेज हो गई हैं। हालात को देखते हुए समाजवादी पार्टी के प्रमुख अखिलेश यादव ने अपना प्रस्तावित दौरा रद्द कर दिया है।

सपा प्रतिनिधिमंडल पहुंचा पीड़ित परिवार के पास

दौरा रद्द होने के बावजूद समाजवादी पार्टी का एक प्रतिनिधिमंडल पीड़ित परिवार से मिलने पहुंचा। पार्टी की ओर से परिवार को आर्थिक मदद के तौर पर 5 लाख रुपये का चेक सौंपा गया।

सुरक्षा के चलते लिया गया फैसला

स्थानीय प्रशासन द्वारा इलाके में कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए सख्त कदम उठाए गए हैं। इसी वजह से अखिलेश यादव का दौरा टाल दिया गया, ताकि किसी भी तरह की भीड़ या तनाव की स्थिति न बने।

कटरिया क्षेत्र में लागू की गई धारा 163

घटना के बाद कटरिया इलाके में सुरक्षा बढ़ा दी गई है। प्रशासन ने एहतियात के तौर पर धारा 163 लागू कर दी है, जिससे भीड़ इकट्ठा होने और अशांति फैलने पर रोक लगाई जा सके।

हालात पर प्रशासन की नजर

पुलिस और प्रशासन लगातार स्थिति पर नजर बनाए हुए हैं। इलाके में अतिरिक्त सुरक्षा बल तैनात किया गया है और संवेदनशील जगहों पर निगरानी बढ़ा दी गई है।

राजनीतिक और सामाजिक प्रतिक्रिया

घटना के बाद राजनीतिक दलों की सक्रियता भी बढ़ गई है। सपा की ओर से की गई आर्थिक सहायता और दौरा रद्द करने का फैसला स्थिति को शांत बनाए रखने की कोशिश के रूप में देखा जा रहा है।

निष्कर्ष

गाजीपुर की इस घटना ने एक बार फिर कानून-व्यवस्था और संवेदनशील मामलों में सतर्कता की जरूरत को उजागर किया है। प्रशासन और राजनीतिक दल दोनों ही हालात को नियंत्रित रखने की दिशा में कदम उठा रहे हैं।

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40 साल बाद मिला परिवार: कानपुर अस्पताल में तस्वीर बनी बिछड़े रिश्तों की कड़ी

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उत्तर प्रदेश के कानपुर से एक भावुक कर देने वाली घटना सामने आई है, जहां दशकों से बिछड़ा एक परिवार आखिरकार फिर से मिल गया। इस अनोखी मुलाकात की वजह बनी एक पुरानी और धुंधली तस्वीर, जिसने वर्षों पुरानी दूरी को खत्म कर दिया।

अस्पताल के ICU में हुआ मिलन

जानकारी के अनुसार, यह घटना कानपुर के एक अस्पताल की है, जहां एक बुजुर्ग व्यक्ति गंभीर हालत में ICU में भर्ती थे। इसी दौरान एक पुरानी तस्वीर के जरिए उनके परिवार का पता लगाया गया और लंबे समय से बिछड़े बेटे उनसे मिलने पहुंचे।

तस्वीर ने जोड़ा रिश्तों का धागा

बताया जा रहा है कि कई साल पहले किसी कारणवश पिता और उनके बेटे एक-दूसरे से अलग हो गए थे। समय के साथ संपर्क पूरी तरह टूट गया, लेकिन एक पुरानी तस्वीर ने पहचान की कड़ी को फिर से जोड़ दिया।

भावुक पल बना यादगार

जब बेटे अस्पताल पहुंचे और ICU में अपने पिता से मिले, तो वहां मौजूद सभी लोग इस दृश्य को देखकर भावुक हो गए। यह पल न सिर्फ परिवार के लिए, बल्कि अस्पताल स्टाफ के लिए भी बेहद खास बन गया।

40 साल बाद खत्म हुआ इंतजार

करीब चार दशकों के लंबे इंतजार के बाद यह मिलन संभव हो पाया। इस घटना ने यह साबित कर दिया कि रिश्तों की डोर कितनी भी कमजोर क्यों न हो, सही समय पर वह फिर से जुड़ सकती है।

सोशल मीडिया पर चर्चा

यह भावुक कहानी सामने आने के बाद सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रही है। लोग इसे एक मिसाल के तौर पर देख रहे हैं, जहां उम्मीद और इंसानियत ने मिलकर एक परिवार को फिर से जोड़ा।

निष्कर्ष

कानपुर की यह घटना रिश्तों की अहमियत और उम्मीद की ताकत को दर्शाती है। यह कहानी बताती है कि समय कितना भी बीत जाए, अपने कभी पराए नहीं होते।

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